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प्रिया रमानी ने अदालत में जो बोला उसे हर कोई सुने

आज प्रिया रमानी ने अदालत में पेशी के दौरान कहा कि उन्हें इस केस की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है।बीते साल मीटू मूवमेंट के दौरान, एमजे अकबर पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। उनके ऊपर करीब 15 महिलाओं ने सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए थे। प्रिया भी उनमें से एक थीं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए एमजे अकबर पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनका यौन शोषण किया। साथ ही यह भी आरोप लगाया था कि अकबर दर्जनों महिला पत्रकारों का यौन शोषण कर चुके हैं. और वह अकेली नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर प्रिया रमानी के इस बयान के बाद एमजे अकबर के ऊपर  कई और महिलाओं ने इसी तरह के आरोप लगाए। 2 दर्जन से अधिक महिला पत्रकारों ने यौन शोषण की बात सोशल मीडिया के जरिए कही। बात बढ़ती चली गई। आखिरकार एमजे अकबर को मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. उसके बाद अकबर ने प्रिया रमानी पर मानहानि का केस ठोक दिया।

9 सितंबर को एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल  के कोर्ट में  इस मामले की सुनवाई हुई. प्रिया रमानी की पेशी में एमजे अकबर की तरफ से सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा ने प्रिया रमानी से सवाल-जवाब किए. प्रिया ने अपने बचाव में कहा,

‘जब मैंने वोग मैगजीन में अपने पहले जॉब इंटरव्यू के अनुभव के बारे बताया और ट्वीट किया, तो मैंने  सच कहा था. हममें से बहुतों को ये विश्वास दिलाते हुए पाला-पोसा जाता है कि चुप्पी एक गुण है।’

‘एमजे अकबर को लेकर मैंने जितनी भी बातें कहीं हैं, सब लोगों की भलाई और पब्लिक इंटरेस्ट में कही हैं। मुझे ये आशा थी कि मी टू मूवमेंट के तहत किए गए ये खुलासे महिलाओं को सशक्त करेंगे,और काम की जगह पर उनके अधिकारों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेंगे।

मुझे इस केस से कुछ मिलने वाला नहीं है। चुप रहकर मैं इस पूरी निशानेबाजी से (जो मुझपर की जा रही है) बच सकती थी, लेकिन वो सही काम नहीं होता।’ प्रिया से सवाल-जवाब में पूछा गया कि उन्होंने द एशियन एज में कितने आर्टिकल लिखे। उन आर्टिकल्स की हेडलाइन भी पूछी गई. इन के जवाब में प्रिया ने बताया कि उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज पर आर्टिकल्स लिखे थे, लेकिन हेडलाइंस उन्हें याद नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी।

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