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दिलीप पांडे ने ट्वीट कर कुमार विश्वास की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल - democracia
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दिलीप पांडे ने ट्वीट कर कुमार विश्वास की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

एजेंसी

आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई के पूर्व संयोजक दिलीप पांडेय के  ट्वीट ने पार्टी के अंदर की उथल पुथल फिर से ज़ाहिर कर दी है। अमानतुल्लाह प्रकरण अभी पूरी तरह से धूमिल भी नहीं हुआ था कि दिलीप पांडेय ने आप के राजस्थान प्रभारी कुमार विश्वास की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल खड़े किए हैं। पांडेय की टिप्पणी को कुमार के एक निजी चैनल को दिए गए साझात्कार से जोड़कर देखा जा रहा है।इसमें वे कह चुके हैं कि मोदी बनाम केजरीवाल के वाक्युद्ध की नकारात्मक राजनीति का परिणाम देश देख चुका है, राजस्थान में पार्टी मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी, निजी हमले नहीं किए जाएंगे। हालांकि कुमार ने दिलीप के ट्वीट पर टिप्पणी से फिलहाल इनकार किया है।

बुधवार को पांडेय ने ट्वीट किया कि- भैया, आप कांग्रेसियों को ख़ूब गाली देते हो, पर कहते हो कि राजस्थान में वसुंधरा के खिलाफ नहीं बोलेंगे? ऐसा क्यों? कपिल प्रकरण के बाद विश्वास को आप की राजस्थान इकाई का प्रभार सौंप आम आदमी पार्टी के अंदर सब कुछ सामान्य होने का माहौल बनाया गया था। लेकिन पांडेय की इस टिप्पणी ने पार्टी के अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। विश्वास ने सेना प्रमुख को लेकर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के ‘ओछे बयान’ की आलोचना की थी। लेकिन राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलने के विश्वास के बयान का हवाला देते हुए पांडेय ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए।

एक चैनल में कुमार ने कहा था कि वे राजस्थान की भाजपा सरकार पर हमला करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री के निजी जीवन पर टिप्पणी नहीं करेंगे। मोदी बनाम केजरीवाल की लड़ाई की तरफ संकेत देते हुए कुमार ने यह भी कहा था कि नकारात्मक राजनीति का परिणाम देश देख चुका है। कुमार ने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी के कुछ लोगों द्वारा उनकी छवि को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन वे इससे चिंतित नहीं हैं। इसके पहले भी वे राजस्थान के पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में साफ कर चुके हैं कि विधानसभा चुनाव पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर लड़ा जाएगा, नकारात्मक राजनीति पर नहीं। कुमार का यह भी कहना था कि दिल्ली में भारी जीत के बाद पार्टी ने लगातार पराजय देखी है, इसलिए राजस्थान चुनाव काफी अहम है, वहां पार्टी अपने मूलभूत सिद्धांतों पर लौटेगी। राज्य में दिल्ली के नेताओं के बजाय स्थानीय नेताओं को तवज्जो दी जाएगी। पार्टी प्रभारी या पर्यवेक्षक की तस्वीरें, बैनर, पोस्टर और सोशल मीडिया पर नहीं दिखाई जाएंगी, और उनके अधिकार सीमित होंगे।

कुमार विश्वास के इन बयानों के बाद ही दिलीप पांडेय ने अपना ट्वीट किया। कुमार विश्वास की विश्वसनीयता पर पार्टी के अंदर इसके पहले भी प्रश्न उठे हैं। निगम चुनाव परिणामों के तुरंत बाद आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने कुमार विश्वास के खिलाफ भाजपा का एजंट होने और पार्टी के अंदर बगावत का सूत्रधार होने का खुला आरोप लगाया था। इससे नाराज कुमार को मनाने के लिए पार्टी ने खान को राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) से बर्खास्त किया और एक जांच बिठाई।

इसके साथ ही कुमार को राजस्थान विधानसभा चुनाव की कमान सौंपी गई। उधर कुमार का साथ देने के एवज में कपिल मिश्र को अपनी कुर्सी गवांनी पड़ी, हालांकि प्रत्यक्ष तौर पर कारण कुछ और बताया गया। इस हालिया बयानबाजी पर कपिल ने कहा है कि यह सब कुछ अरविंद केजरीवाल के कहने पर किया जा रहा है। कपिल मिश्र का यह कहना मायने रखता है क्योंकि खान के खिलाफ कार्रवाई के फैसले के बाद मनीष सिसोदिया ने घर जाकर खान से मुलाकात की थी। हालांकि इस पर कुमार ने कहा है कि उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री किसके घर जाते हैं, वह उनका विशेषाधिकार है।

कपिल के लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों और अंदरूनी कलहों को झेल रही पार्टी फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव के इर्द-गिर्द फैली राष्ट्रीय राजनीति से भी अलग-थलग है। माना जा रहा है कि विपक्ष के साझा उम्मीदवार की तलाश की कवायद से आप को दूर रखा जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी पूर्व में केजरीवाल द्वारा अपने वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों के कारण आप को शामिल किए जाने के पक्ष में नहीं है।