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युद्ध हुआ तो दस दिन में खत्म हो जायेगा गोला बारूद – कैग

संसद में पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर युद्ध छिड़ जाए तो भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने गोला-बारूद में से 40 फ़ीसदी तो 10 दिन में ही ख़त्म हो जाएगा. जंग छिड़ने की स्थिति में 70 फ़ीसदी टैंक और तोपों के 44 फ़ीसदी गोले 10 दिन में समाप्त हो जाएंगे..

नियमानुसार, सेना के पास कम से कम 40 दिनों का हथियार और गोला-बारूद होना चाहिए. ऐसे में जब पाक और चीन की सीमाओ पर भारी तनाव की स्थिति है. भूटान चीन सीमा पर भारतीय सेना की उपस्थिती से चीन की बौखलाहट और बार बार युद्ध की धमकियो के बाद बढ रही युद्ध की आशंकाओ की खबरो के बीच में ये खबर अच्छी नही है.

यदि ऐसे समय मे युद्ध छिड जाये तो गोला बारूद एवम अन्य रसद की आपूर्ती कैसे होगी , वैसे ही कश्मीर मे आये दिन सैनिको की मृत्यु व अनियंत्रित होती आतंकी घटनाओ से देश अलग जूझ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार देश की ऑर्डिंनेस फैक्ट्रियां पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाने के साथ क्षतिग्रसत सामानों की मरम्मत भी नहीं कर पा रही हैं। गोला-बारूद के डिपो में अग्निशमनकर्मियों की कमी रही और उपकरणों से हादसे का खतरा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी में आर्मी के गोला-बारूद मैनेजमेंट का फॉलोअप ऑडिट किया गया।

रक्षा मंत्रालय ने 40 दिन की अवधि के लिए इस रिजर्व को मंजूरी दी थी। 1999 में आर्मी ने तय किया कि कम से कम 20 दिन की अवधि के लिए रिजर्व होना ही चाहिए। सितंबर 2016 में पाया गया कि सिर्फ 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर खरे उतरे। 55 फीसदी गोला बारूद 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम थे। हालांकि इसमें बेहतरी आई है, लेकिन बेहतर फायर पावर को बनाए रखने के लिए बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरी लेवल से कम पाए गए।

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