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चीन की गलवान जैसी हरकतें जारी

हिसाम सिद्दीकी

वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी फिर डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह के लद्दाख दौरों के जरिए साफ मैसेज दिए जाने और दोनों मुल्कों के आला फौजी अफसरान के दरम्यान मुसलसल जारी मीटिगों के बावजूद चीन सरहदी इलाकों मे की जा रही काबिले एतराज हरक’तें बंद करने के लिए तैयार नहीं है। हमारी सरकार की जानिब से इस सिलसिले में मुल्क से मुसलसल गल’तबयानी की जा रही है यानी झूठ बोला जा रहा है।

अब भारत सिर्फ अपने दम पर ही नहीं बल्कि अमरीका और जापान जैसे मुल्कों के सहारे चीन से निपटने की बातें कर रहा है। वजह यह है कि साउथ चाइना समन्दरी इलाके में अमरीका ने ताकतवर सबमैरीन तैनात कर रखी है हमारे मुल्क के जिम्मेदारों का ख्याल है कि अमरीका भारत के मफाद में चीन से ट’करा सकता है, भले ही उसके नतीजे मे तीसरी आलमी जंग हो जाए। एक तरफ वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ‘आत्मनिर्भर’ बनने की बातें कर रहे हैं इसी के साथ वह अब भारत का तमाम कारोबार अमरीकी कम्पनियों को सौंपने की बातें करने लगे हैं। उन्हें यह एहसास नहीं है कि उन्होंने बगैर सोचे-समझे गुजिश्ता छः सालों में भारत का तकरीबन तमाम कारोबार चीनी सरमायाकारों (निवेशकों) और मल्टी नेशनल कम्पनियों के हाथों सौंप कर कितनी बड़ी भूल की थी।

चीन की हालत यह है कि जिस दिन डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह लद्दाख और कुछ सरहदी इलाकों का दौरा कर रहे थे उसी दिन यह खबरें भी आई कि चीन ने डेपसांग और दौलतबेग ओल्डी इलाकों में बड़े पैमाने पर पुख्ता तामीरात करना शुरू कर दिया जिसपर भारत ने स’ख्त एतराज जताया है। सवाल यह है कि सिर्फ एतराज जताने से क्या होगा। बाइस जुलाई तक यही खबरें आ रही थीं कि जिस रफ्तार से फौजों को पीछे हटना चाहिए था उस रफ्तार से हट नहीं रही हैं। जिस किस्म का तामीरी काम (निर्माण कार्य) चीनी फौज डेपसांग और दौलतबेग ओल्डी में कर रही हैं उसी तरह की तामीर को रोकने के लिए पन्द्रह जून को हिन्दुस्तानी फौजी गलवान वादी में चीनी फौजियों के पास गए थे और चीनियों ने हमारे बीस जांबाज फौजियों को शही’द कर दिया था। पेगोग झील पर भी काफी अंदर तक काबिज है और तमाम बातचीत के बावजूद पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

सेटेलाइट तसावीर में साफ दिख रहा है चीन की फौज हाटस्प्रिंग इलाके में तकरीबन पांच किलोमीटर तक भारत में घुसी थी तमाम समझौतों और बातचीत के बावजूद पूरी तरह से इस इलाके से पीछे नहीं हटी है। मशरिकी (पूर्वी) लद्दाख मे पेट्रोलिंग प्वाइंट पन्द्रह पर अब भी भारतीय फौज नहीं जा पा रही है। क्योकि समझौते के बाद चीन पहले ढाई किलोमीटर पीछे हटा फिर एक किलोमीटर यानी कुल साढे तीन किलोमीटर जबकि घुसा था पांच किलोमीटर तक अब भी वह तकरीबन डेढ किलोमीटर भारत के अंदर बैठा हुआ है। बीस जून से अब तक दोनों तरफ के सीनियर फौजी अफसरान के दरम्यान हुई तफसीली बातचीत के मुताबिक अब तक चीन को पूरी तरह भारतीय जमीन खाली कर देनी चाहिए थी लेकिन नहीं कर रहा है। चीन की यह बहुत पुरानी आदत है कि वह दस कदम आगे बढने के बाद छः-सात कदम वापस पीछे हटता है और कहता है कि हम पीछे हट गए हालांकि हकीकत में वह तीन-चार किलोमीटर अंदर ही बैठा रहता है।

दोनों मुल्कों के दरम्यान डिप्लोमेटिक और फौजी सतह पर बातचीत जारी रहने के बावजूद चंद दिनों में चीन की जानिब से मशरिकी (पूर्वी) लद्दाख में चीन ने बड़ी मिकदार (मात्रा) में फौजी साज व सामान नफरी इकट्ठा की है इस बात के पुख्ता सबूत न सिर्फ मौजूद हैं बल्कि बातचीत के दौरान यह सबूत चीनी अफसरान के सामने रखे भी जाते हैं वह इन सबूतों को देखकर टालमटोल वाली बातें करते रहते हैं। लेकिन साफ तौर पर यह नहीं मानते कि हां उनकी जानिब से समझौते की खि’लाफवर्जी हुई है।

दोनों मुल्कों के दरम्यान हुए समझौतों पर अमल करने के बजाए अब चीन तरह-तरह की नई-नई शर्तें थोप कर पेगोग और फिंगर चार से आठ तक पीछे नहीं हट रहा है। भारत का कहना है कि आज नहीं तो कल चीन को हर हाल में पीछे हटना पडे़गा क्योंकि पहले वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनके बाद डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सरहद के नजदीक जाकर बड़ी मजबूती के साथ चीन को पैगाम दे दिया है कि हम अपनी एक इंच भी जमीन पर किसी के पैर नहीं रहने देंगे। सवाल यह है कि ऐसे मजबूत बयानात और बातचीत का क्या मतलब जिसका सामने वाले फरीक पर कोई असर ही न पड़े और तमाम बयानबाजियों के बावजूद वह अपने नापाक इरादों पर ही कायम रहे।

भारत ने भी माना है कि पेट्रोलिंग प्वाइंट दस से तेरह तक चीनी फौजियों ने इस अंदाज में कब्जा कर रखा है कि हमारे फौजियों को पेट्रोलिंग भी नहीं करने दे रहे हैं। इस इलाके मे भी बड़े पैमाने पर पुख्ता तामीरी काम भी चीन कराता ही जा रहा है। चीनी फौजी पेगोग त्सो लेक के फिंगर पांच से आठ तक जमी हुई है जबकि भारत ने चौदह जुलाई के तकरीबन पन्द्रह घंटों तक चली आला फौजी अफसरान की मीटिंग में साफ कह दिया था आप फिंगर आठ तक का इलाका खाली कीजिए। भारतीय सेना वादे के मुताबिक फिंगर दो और फिंगर तीन के दरम्यान आ गई। उधर डेप्सांग मे पेट्रोलिंग प्वाइंट दस, ग्यारह और बारह में भी चीनी फौजों का जमावड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में बातचीत और समझौतों का क्या मतलब।

मोदी सरकार सरहद पर चीन से निपट पाने में नाकाम है लेकिन देश को गुम’राह करने की सरग’र्मियों में कोई कमी नहीं आ रही है। देश के जज्बात भड़’काए रखने के लिए ही डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने सत्रह जुलाई को जब लद्दाख का दौरा किया तो वहां से चीन से ज्यादा पाकिस्तान को ल’लकारने का काम किया। सवाल यह है कि इस वक्त चीन को ललका’रने की जरूरत है या पाकिस्तान को? पाकिस्तान को उन्होने सिर्फ इसलिए ललकारा कि उनका भी वजीर-ए-आजम मोदी की तरह अस्ल मकसद चीनी घुसपैठ से देश के लोगों का ध्यान हटाना था।

चीन तो मुसलसल ह’ठधर्मी पर ही कायम है लेकिन इधर मोदी हुकूमत अपने गुलाम मीडिया के लफ्फाज ऐकर्स के जरिए चीन के साथ जंग लड़ रहे हैं। एक ही तरह के वीडियो तकरीबन तमाम प्राइवेट चैनलों पर घंटों दिखाए जाते हैं। उनके साथ एेंकरों की बेवकू’फी भरी कमेण्ट्री जारी रहती है। मसलन दक्खिन चीनी समन्दर में अमरीका और जापान के बहरी बेड़ों की मौजूदगी दिखाते हुए हमारे एेंकर्स कह रहे थे कि अमरीका और जापान दोनों भारत के साथ चीन के खिलाफ मैदान में आ गए हैं। चीनी सदर शी जिनंपिंग की बोलती बंद हो गई है। वह छुपे हुए हैं इन हालात की वजह से चीन में उनके तख्ता पलट का भी भरपूर इमकान है। बाइस जुलाई को यही चैनल चीख-चीख कर कह रहे थे कि मिग-29 के और पी-8 वन लड़ाकू तय्यारे भारत ने सरहद पर तैनात कर दिए हैं दो-तीन दिनों में राफेल की पहली खेप आ जाएगी। राफेल और अमरीका से खरीदे गए ताकतवर अपाचे हेलीकाप्टर भी सरहद पर ही तैनात किए जाएंगे। यह ऐसी मजबूत तैयारी है कि जिस दिन हमारे जहाज चीन पर गर’जे चीन दुनिया के नक्शे से ही गायब हो जाएगा। भारत ने चीन को पूरी तरह नेस्त व नाबूद करने का प्रोग्राम बना लिया है। इन बेवकूफों को कौन समझाए कि आज की दुनिया में किसी भी मुल्क को दुनिया के नक्शे से मिटा पाना या नेस्त व नाबूद करना नामुमकिन है। अगर मुमकिन होता तो अमरीका जैसा ताकतवर मुल्क अपने पड़ोसी क्यूबा, मैक्सिको और वेनेजुएला जैसे मुल्कों को तो नेस्त व नाबूद कर ही चुका होता।

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