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छत्तीसगढ़: पिछले 10 वर्षों में इस साल सबसे ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या की


छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा आत्महत्या करने के मामले बढ़ोत्तरी हुई है. वायर में छपी रिपोर्ट के अनुसार इस साल यानी 2017 में 36 सुरक्षाकर्मियों ने आत्महत्या कर ली जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है.

हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह राज्य में पिछले एक दशक में सुरक्षाकर्मियों की आत्महत्या का सबसे अधिक आंकड़ा है और किसी एक साल का भी सबसे बड़ा आंकड़ा है. राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों की आत्महत्या की सबसे ज्यादा संख्या 2009 में 13 थी, जो इस साल बढ़कर 36 हो चुकी है.

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि 2007 से इस साल तक कुल मिलाकर 115 से ज्यादा आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं. छत्तीसगढ़ के 17 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित हैं. 2017 के आंकड़ों के अनुसार पिछले दस सालों में सुरक्षाकर्मियों की कुल आत्महत्याओं का 31 प्रतिशत मौजूदा वर्ष में हुई हैं.

राज्य की स्थापना सन 2000 में हुई थी और राज्य पुलिस अभी 2000-2007 के बीच आत्महत्या के आंकड़ों को जुटा रही है.सुसाइड नोट में दर्ज कारणों पर सूत्रों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों की आत्महत्या के प्रमुख कारणों में कठोर परिस्थितियों में काम, अवसाद, छुट्टी प्राप्त करने में कठिनाई और एक मामले में भाई का विवाह और होम सिकनेस हैं.

व्यक्तिगत/परिवार (50%), बीमारी संबंधी (11%), कार्य से संबंधित (8%), अनजान/जांच के तहत (18%) और अन्य (13%) के रूप में आत्महत्या के कारणों को वर्गीकृत किया गया है.

संयोग से कुल 115 आत्महत्याओं में से 67 माओवादी हिंसा से प्रभावित इलाके में थे- बस्तर डिवीजन के सात जिलों में कांकेर, कोंडगांव, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर हैं.छत्तीसगढ़ के विशेष महानिदेशक (नक्सल परिचालन) डीएम अवस्थी ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताया है.

अवस्थी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘आत्महत्याओं के कारणों की जांच के लिए पुलिस स्तर के एक अधीक्षक की नियुक्ति की जाएगी. हम 2015 (6), 2016 (12) और 2017 के आंकड़ों को रोकने के लिए एक योजना तैयार करने के लिए ध्यान देंगे. हम जरूरत के हिसाब से मनोवैज्ञानिकों की भी मदद लेंगे.’

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात राज्य पुलिसकर्मियों में विशेष कार्यबल और जिला आरक्षित गार्ड शामिल हैं, जबकि सीएपीएफ के जवान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) भी सुरक्षा में तैनात हैं.

बस्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आत्महत्याओं से फोर्स के भीतर जवानों का आत्मविश्वास कम होता है. माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ों के दौरान सहकर्मियों की मौत भी उनको प्रभावित करती है.इस साल में माओवादियों से मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने अब तक 69 माओवादियों को मार गिराया है, लेकिन इन मुठभेड़ों के चलते 59 सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं.