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RTI कार्यकर्ता अमित जेठवा के हत्या मामले में पूर्व भाजपा सांसद को उम्रकैद की सज़ा

हैदराबाद: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को जुलाई 2010 में आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के मामले में भाजपा के पूर्व सांसद और छह अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई. अदालत ने छह जुलाई को इन सभी को दोषी करार दिया था और सजा पर फैसला सुरक्षित रखा था. दूसरे दोषियो में सांसद का भतीजा शिवा सोलंकी, संजय चौहान, शैलेश पांड्या, पचन देसाई, उडाजी ठाकोर और पुलिस कांस्टेबल बहादुरसिंह वाडेर शामिल हैं.

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश केएम दवे ने बृहस्पतिवार को सजा का ऐलान किया. उन्होंने सोलंकी और उसके भतीजे पर 15-15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. उसका भतीजा भी मामले में आरोपी है.

अदालत ने फैसला सुनाते हुए सोलंकी और उसके भतीजे शिवा सोलंकी और पांच अन्य को हत्या तथा इसकी साजिश रचने का दोषी ठहराया. सोलंकी 2009 से 2014 तक जूनागढ़ के सांसद रह चुके हैं.

पिछले हफ्ते अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में दोषी करार दिया था.

मामले में दोषी पाए गए पांच अन्य आरोपियों में शैलेष पंड्या, बहादुर सिंह वढेर, पंचेन जी देसाई, संजय चौहान और उदयजी ठाकोर शामिल हैं.

पेशे से वकील जेठवा की गिर वन्यजीव अभयारण्य और उसके आसपास अवैध खनन का आरटीआई आवेदनों के जरिये खुलासा करने को लेकर गोली मारकर हत्या कर दी गई. इन खनन गतिविधियों में सोलंकी शामिल था. जेठवा ने 2010 में गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की थी.

दीनू सोलंकी और शिव सोलंकी याचिका में प्रतिवादी बनाए गए थे. जेठवा ने अवैध खनन में उनकी संलिप्तता को उजागर करने के लिए कई दस्तावेज पेश किए थे.

शुरुआत में अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा ने मामले की जांच की और दीनू सोलंकी को क्लीनचिट दे दी थी. इस जनहित याचिका पर सुनवाई के समय ही गुजरात हाईकोर्ट के बाहर 20 जुलाई 2010 को जेठवा की हत्या कर दी गई थी.

मृतक के पिता भीखाभाई जेठवा के हाईकोर्ट का रुख करने के बाद अदालत ने जांच पर असंतोष जताते हुए साल 2013 में मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था.

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