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BHU- यौन शोषण के दोषी प्रोफेसर को बहाल कर दिया गया, स्टूूडेंट्स का आरोप

स्टूडेंट्स से छेड़छाड़ को लेकर बीते सालों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कई प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन ऐसे मामले के प्रति प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

वायर की हिंदी वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार हालिया मामला प्रोफेसर एसके चौबे का है। प्रो. चौबे को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें, अभद्रता और भद्दी टिप्पणियों का दोषी पाए जाने और जांच कमेटी द्वारा कठोरतम कार्रवाई के आग्रह के बावजूद बहाल कर दिया गया है।

ऐसा तब हुआ है जब छेड़खानी के मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने के चलते पिछले कुलपति को जबरन छुट्टी पर भेजना पड़ा था और बीएचयू कैंपस को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए किया गया छात्राओं का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था।

अक्टूबर 2018 में जंतु विज्ञान विभाग के बीएससी के पांचवे सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने कुलपति को पत्र लिख कर प्रो. चौबे पर एक शैक्षणिक यात्रा छात्राओं के साथ शारीरिक छेड़खानी और अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

छात्र-छात्राओं का यह समूह 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2018 तक प्रो. चौबे के साथ भुवनेश्वर की शैक्षणिक यात्रा पर थे। इस यात्रा से लौटने के बाद 13 अक्टूबर को प्रो. चौबे के बर्ताव को लेकर यह सामूहिक शिकायत की गई थी।

शिकायत के अनुसार, विद्यार्थियों ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क जाकर जंतुओं के विषय में अध्ययन करना था, लेकिन प्रो. चौबे पार्क में बहुत कम समय देकर सभी को कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर ले गए। वहां जाकर उन्होंने परिसर की प्रतिमाओं की यौन भावभंगिमाओं के बारे में बताना शुरू किया, जिससे सभी असहज हो गए।

खबर के अनुसार विद्यार्थियों का कहना है कि साथ ही उन्होंने समूह के साथ चल रहे गाइड को ‘मेन पॉइंट’ पर आने को बोला, जिससे उनका आशय यौन क्रियाओं के वर्णन से था। छात्र-छात्राओं के अनुसार प्रो. चौबे का यह कृत्य यौन प्रताड़ना जैसा था. छात्र-छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया था कि शिकायत करने की स्थिति में प्रोफेसर की तरफ से प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी भी दी जाती है।

छात्र-छात्राओं का कहना है कि प्रो. चौबे पर सालों से इस तरह के आरोप लगते आए थे। इस मामले को तूल पकड़ता देख तब कुलपति राकेश भटनागर ने इस शिकायत को विश्वविद्यालय की इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) को जांच के लिए सौंप दिया था. कुलपति द्वारा यह आश्वासन भी दिया गया था कि दोष साबित होने पर आरोपी खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके बाद 25 अक्टूबर 2018 लेकर 30 नवंबर 2018 तक आईसीसी द्वारा इस मामले की जांच की गई, जहां कमेटी ने सभी पीड़ितों, गवाहों, आरोपी, विभागाध्यक्ष, पूर्व विभागाध्यक्षों और मामले से जुड़े हुए लोगों से बात की है।

डेढ़ दर्जन से ऊपर शिकायतकर्ताओं, गवाहों और दस पूर्व विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों से बात करने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें उसने प्रो. चौबे पर लगे आरोपों सिद्ध पाया। कमेटी की जांच में यह भी सामने आया कि प्रो. चौबे छात्राओं के साथ अश्लील हरकतों के आदी हैं और लंबे समय से ऐसा करते आ रहे हैं।

वायर के अनुसार आईसीसी रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं की आपबीती प्रो. चौबे के व्यवहार पर सवालिया निशान खड़े करती है।  रिपोर्ट में एक पहली शिकायतकर्ता ने बताया, ‘प्रो. चौबे अक्सर शारीरिक बनावट को लेकर कमेंट करते थे और क्लास में महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम और जननांगों को लेकर बातें करते थे। उक्त विषय प्रो. चौबे का न होने के बावजूद भी वे जानबूझकर ऐसी चर्चा करते थे, जो हम लोगों को अत्यंत असहज करता था।’

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