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भीम आर्मी को मिला जानेमाने जजों, लेखकों, पत्रकारों और कलाकारों का समर्थन

देश के जाने माने न्यायधीश, पत्रकार, कार्यकर्ता और लेखकों ने भीम आर्मी, संस्थापक चंद्रशेखर और उसके कार्यकर्ताओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) लगाए जाने की योजना की निंदा करते हुए एक साझा बयान जारी किया है।  जस्टिस पीबी सावंत (सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट), जस्टिस होस्बेत सुरेश (सेवानिवृत्त, बॉम्बे हाइकोर्ट), जस्टिस कोलसे पाटिल ( पूर्व बॉम्बे हाईकोर्ट), राम पुन्यानी (लेखक और कार्यकर्ता) जावेद आनंद (पत्रकार व कार्यकर्ता), मुनीजा खान (अकादमिक और कार्यकर्ता), खालिद अनीस अंसारी (अकादमिक और पसमांदा डेमोक्रेटिक फोरम) ने भीम आर्मी और उसके सभी सदस्यों का समर्थन किया है।

 

बयान के मुताबिक, सहारनपुर जिले के रामपुर और सहरनपुर शहर के बाहर 9 मई 2017 को भीषण हिंसा हुई। यह हिंसा तब हुई जब भीम सेना द्वारा गांधी पार्क में आयोजित एक शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया गया था जिस पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था।

5 जुलाई को शब्बीरपुर गांव में दलितों के खिलाफ हो रही हिंसा के खिलाफ भीड़ इकट्ठे हुई थी जिस पर राजपूतों की एक भीड़ ने हमला किया और 60 दलित घरों को जला दिया। इस हमले में कई दलितों को गंभीर रुप से घायल किया गया। जिन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई लोग गांव में हिंसा के डर से भाग गए हैं।

इस संदर्भ में भीम सेना ने गांधी मैदान में एक सभा को बुलाया था जहां वे पीड़ितों के लिए मुआवजा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसके बदले पुलिस ने लाठीचार्ज शुरु किया जिससे सहारनपुर शहर और रामपुर शहर के हिस्सों में प्रतिशोधी हिंसा उत्पन्न हुई। हिंसा के उस दौरान लाठी चार्ज करना निश्चित तौर पर निंदनीय है। यह ध्यान रखना जरुरी है कि इस हिंसा में कोई भी मारे नहीं गए और न ही कोई गंभीर रुप से घायल हुए।