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बाबरी केसः डिस्चार्ज एप्लीकेशन ख़ारिज, अडवाणी समेत 12 आरोपियों पर चलेगा आपराधिक साजिश का केस  - democracia
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बाबरी केसः डिस्चार्ज एप्लीकेशन ख़ारिज, अडवाणी समेत 12 आरोपियों पर चलेगा आपराधिक साजिश का केस 

बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की सुनवाई के बाद आज सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पेशी पर आए पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी व केंद्रीय मंत्री उमा भारती सहित 12 आरोपियों को जमानत दे दी। कोर्ट ने इन सभी को 20-20 हज़ार के निजी मुचलके पर जमानत दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने इन सभी नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलाने का फैसला किया है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सोमवार को लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित 11 नेताओं की लखनऊ में सीबीआई की विशोष कोर्ट में पेशी होनी थी। इन सभी पर बाबरी मस्जिद का ढ़ांचा ढ़हाए जेने के मामले में आरोप तय होने थे। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई कोर्ट को  इन नेताओं पर मस्जिद का ढ़ांचा गिराने की साजिश रचने के मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब छूट या सुनवाई सिथगित करने का कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

इन सभी नेताओं के लखनऊ पहुंचने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आडवाणी व अन्य नेताओं से मिले। इन लोगों के अलावा पूर्व सांसद राम विलास वेदांती भी लखनऊ पहुंचे और इस दौरान उन्होंने कहा कि बाबरी ढांचा मैंने ही गिराया है। वहीं उमा भारती ने एक बयान में कहा कि यह एक खुला आंदोलन था और मुझे नहीं पता कि इसमें कोई साजिश भी थी।

ग़ौरतलब कि अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराये जाने के मामले में दर्ज मुकदमों में ये लोग आरोपी हैं। इस मामले में रायबरेली की अदालत से लखनऊ की विशेष अदालत में स्थानांतरित मामले में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित छह आरोपियों के अदालत में हाजिर न होने के कारण आरोप तय नहीं हो सके। 

26 मई को विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव ने आरोप निर्धारित करने के लिए मंगलवार को पेश होने के निर्देश दिए थे। तब अदालत के समक्ष आरोपी लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, उमा भारती एवं साध्वी ऋतंभरा की ओर से हाजिरी माफ किए जाने की अर्जी देते हुए मामले की सुनवाई के लिए अन्य तारीख तय किए जाने का अनुरोध किया गया था।

सभी ने अदालत में हाजिर न होने के लिए अलग-अलग कारण बताए थे। अदालत ने अर्जी मंजूर करते हुए कहा था कि तय तारीख पर सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होंगे। सभी आरोपियों के खिलाफ बाबरी मस्जिद गिराने की साजिश का आरोप है। 

जबकि दूसरी ओर मुख्य आरोप पत्र के छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के लिए विशेष अदालत 25 मई को सुनवाई के बाद 30 मई की तारीख तय कर चुकी है, जिसमें डॉ. राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा प्रेम, महंत नृत्यगोपाल दास, धर्मदास, चंपत राय बंसल एवं डॉ. सतीश प्रधान मुख्य हैं।

इन सभी छह आरोपियों को तकनीकी आधार पर विशेष अदालत आरोप मुक्त कर चुकी है। अब अगली सुनवाई पर 12 आरोपियों के खिलाफ धार्मिक उन्माद और वैमनस्यता और षड्यंत्र रचने के आरोप तय किए जाएंगे।

क्या है मामला

छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के गुंबद को देश भर से आए लाखों कारसेवकों ने गिरा दिया था। आरोप है कि इन नेताओं के उकसाने पर ही कारसेवकों ने ऐसा किया। जिसके बाद जिसके बाद बीजेपी और विहिप के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।  2001 में सीबीआई कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश का आरोप हटा दिया था। इलाहबाद हाई कोर्ट ने भी सीबीआई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।

1992: बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दो FIR

कार सेवकों के ख़िलाफ़ FIR

मस्जिद से 200 मीटर दूर नेताओं पर FIR

एक FIR पर लखनऊ की विशेष अदालत में सुनवाई

दूसरा मामला रायबरेली कोर्ट में

एक की जांच CBI को, दूसरी यूपी CID को

1993: 13 नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश की धारा

दोनों मामलों को लखनऊ कोर्ट ट्रांसफ़र करने की हाइकोर्ट में अर्ज़ी

2001: HC ने कहा, रायबरेली का केस लखनऊ ट्रांसफ़र नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, हाइकोर्ट का फ़ैसला बरक़रार

रायबरेली कोर्ट ने आपराधिक साज़िश की धारा हटाई

2010: हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखा

2011: हाइकोर्ट के फ़ैसले को SC में CBI की चुनौती

2015: पीड़ित हाजी महमूद  ने भी SC में अर्ज़ी दी

19 अप्रैल 2017: SC का आदेश, आपराधिक साज़िश का मामला चलेगा।