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असमः पहली ट्रांसजेंडर न्यायाधीश ने कामकाज संभाला

असम की पहली ट्रांसजेंडर न्यायाधीश गुवाहाटी की एक लोक अदालत में अपना कामकाज संभाल लिया है. इसके साथ ही पूर्वोत्तर का यह राज्य देश का तीसरा ऐसा राज्य बन जाएगा जहां ट्रांसजेंडर न्यायाधीश हैं. इससे पहले पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में ऐसे न्यायाधीश हैं.

26 वर्षीय स्वाति बिधान बरूआ ने कहा कि वह अपना काम कामरूप ज़िला एवं सत्र अदालत की अदालत नंबर 25 में शुरू करेंगी. उन्हें इस पद पर कामरूप (मेट्रो) जिला विधिक सेवाओं द्वारा नियुक्त किया गया है.

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘लोक अदालत में एक न्यायाधीश के पद पर मेरी नियुक्ति समाज के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संदेश है और इससे ट्रांसजेंडरों के ख़िलाफ़ भेदभाव के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में मदद मिलेगी. कुछ नीतियों के असफल होने से ही उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है वरना ट्रांसजेंडर भी समाज के लिए काम कर सकते हैं.’

मालूम हो कि स्वाति 2012 तब पुरुष थीं. तब उनका नाम बिधान था. इसके बाद उन्होंने सर्जरी करा ली और स्वाति बन गई.

2012 में उन्होंने इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख़ किया था, इस सर्जरी के लिए उनके परिवार ने विरोध किया था. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया और वह बिधान से स्वाति बन गईं. स्वाति उस वक़्त मुंबई में नौकरी कर रही थीं.

उनके अलावा पश्चिम बंगाल में जॉयिता मोंडल और महाराष्ट्र में विद्या काम्ले टांसजेंडर जज हैं. देश की पहली ट्रांसजेंडर जज जॉयिता की नियुक्ति 2017 में हुई थी. उसके बाद इस साल फरवरी में विद्या काम्ले नियुक्ति की गई.

एक रिपोर्ट के अनुसार असम में पांच हज़ार से ज़्यादा ट्रांसजेंडर हैं. इसे देखते हुए उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाख़िल की थी. उन्होंने अदालत से ट्रांसजेंडर के अधिकारों के लिए सरकार को आदेश देने की मांग की थी.

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