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जब तक जिन्दा हूँ मेरा दिल और मेरा दरवाज़ा दोनों आप लोगों के लिए खुला रहेगा: राहुल

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुबई, अबुधाबी और यूएई में बसे भारतीयों से एक भावनात्मक अपील की। उन्होंने देश के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें न सिर्फ देश में बसे बल्कि दुनिया के हर हिस्से में बसे सभी भारतीयों का साथ चाहिए। यूएई में एनआरआई समुदाय की कामयाबी और उनकी मेहनत की प्रशंसा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी तीन समस्याओं से निपटने के लिए उन्हें एनआरआई समुदाय की मदद की जरूरत है।

खचाखच भरे दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में अपने भावुकतापूर्ण भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि, “जब तक मैं जिंदा हूं, मेरे दरवाज़े, मेरा दिल आपके लिए, सबके लिए खुला है।”

देश में साढ़े चार साल से असहिष्णुता का माहौल – राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में बताया कि उन्होंने दुबई के किंग से मुलाकात की जो बेहद विनम्र हैं। उनमें कोई अहंकार नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा कि, “…महान देश विनम्रता से बनते हैं, एक नेता जो दूसरों को सुनता है, लोगों के योगदान की प्रशंसा करता है, वही महान नेता होता है।“

उन्होंने कहा कि, “यह संयोग है कि इस साल यूएई में सहिष्णुता का साल मनाया जा रहा है, लेकिन मुझे दुख है कि जो मूल्य लोगों को एक दूसरे के साथ लाते हैं, वह मूल्य विनम्रता और सहिष्णुता है, विभिन्न धर्मों, विभिन्न समूहों के लोगों को साथ लाते हैं, लेकिन हमारे देश में साढ़े चार साल से असहिष्णुता का दौर जारी है।“

एनआरआई भारत की सबसे बड़ी ताकत – राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष ने एनआरआई समुदाय से कहा कि, “आप भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। न सिर्फ दुबई में रहने वाले भारतीय, बल्कि, पूरी दुनिया में रहने वाले भारतीयों से कहना चाहता हूं कि आपने भारत को महान बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। आपके बिना संभव नही था कि भारत आज जहां हैं वहां पहुंच पाता।“

राहुल गांधी ने देश के इतिहास में एनआरआई समुदाय के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, “पिछली सदी में जब हमने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन शुरु किया, तो उसकी शुरुआत एक एनआरआई ने की, उनका नाम महात्मा गांधी था। देश में जब संचार क्रांति आई तो उसे एक एनआरआई ने शुरु किया, उनका नाम सैम पित्रोदा है, और देश में जब आर्थिक उदारवाद का दौर शुरु हुआ और आर्थिक क्रांति आई, तो उसे भी एक एनआरआई ने शुरु किया, उनका नाम डॉ मनमोहन सिंह है।“

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