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कश्मीर में शर्मनाक नाकामी………

हिसाम सिद्दीकी

‘हमने सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए सरहद पार पाकिस्तान में घुसकर उन्हें सबक सिखाया, आगे भी हम पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए मुंह तोड़ जवाब देंगे। फौजियों की शहादत बेकार नहीं जाने देंगे।’ इस तरह की मुसलसल जुमलेबाजी करने वाले वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह, डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण और आर्मी चीफ बिपिन रावत की शर्मनाक नाकामी छः फरवरी को उस वक्त सामने आई जब श्रीनगर के महाराजा हरिसिंह मेडिकल कालेज में इलाज के लिए लाए लश्कर ए तैयबा के खतरनाक पाकिस्तानी दहशतगर्द नवेद जट्ट उर्फ अबू हजुुल्लाह को उसके साथी  दहशतगर्दों ने पुलिस वालों पर हमला करके उसे छुड़ा लिया और हेड कांस्टेबिल मुश्ताक अहमद व कांस्टेबिल बाबर अहमद को शहीद कर दिया।

श्रीनगर के भीड़-भाड़ वाले इलाके में यह वाक्या सरकार और सिक्योरिटी फोर्सेज के लिए न सिर्फ शर्म का बाइस है बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि फौज और सिक्योरिटी फोर्सेज में गद्दारों की शक्ल में कुछ स्याह भेड़ें भी दाखिल हो चुकी हैं। जिन्होने इतने खतरनाक दहशतगर्द को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की खबर लीक की। फौज और कश्मीर पुलिस ऐसे किसी खतरनाक दहशतगर्द को अस्पताल ले जाने के प्रोग्राम की भनक किसी को नहीं लगने देती है।

फिर इसे अस्पताल ले जाने की इत्तेला उसके साथियों को कैेसे मिल गई? यह एक अहम सवाल है जिसका जवाब फौज और सिक्योरिटी फोर्सेज के साथ-साथ सरकार को ही देना है। नवेद जट्ट और कुछ दीगर कैदियों को लेकर जैसे ही पुलिस टीम अस्पताल पहुची, अस्पताल की पार्किग में पहले ही से घात लगाए बैठे दहशतगर्दों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया और उसे छुड़ाकर भाग गए।

इस वाक्ए की इत्तेला फौरन ही पूरे शहर के वायरलेस पर गूंजने लगी इसके बावजूद दहशतगर्द उसे लेकर भागने में कामयाब हो गए। समझा जाता है कि रात में ही दहशतगर्दों ने उसे सरहद पार करा दी होगी। वह पाकिस्तान के साहीवाला मुल्तान का रहने वाला है जिसे कश्मीर पुलिस ने 26 अगस्त 2014 को कुलगाम मंे गिरफ्तार किया था। इस वाक्ए से दो दिन पहले ही चार फरवरी को पाकिस्तानी फौज ने तारकुंडी सेक्टर में एक हिन्दुस्तानी फौजी चैकी पर मिसाइल से हमला करके महज 22 साल के कैप्टन कपिल कुुडू समेत चार लोगों को शहीद कर दिया था। उस वक्त आर्मी चीफ, राजनाथ सिंह और निर्मला सीतारमण सभी ने देश को यकीन दिलाया था कि वह पाकिस्तान से इसका बदला बहुत अच्छी तरह लेंगे।

मोदी हुकूमत, कश्मीर और पाकिस्तान के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। पाकिस्तान के खिलाफ सरकार और हमारी फौज ने क्या किया, महज वोटों की सियासत के लिए बार-बार मोदी हुकूमत इसका जिक्र तो देश के सामने करती है लेकिन हमेशा आधी-अधूरी जानकारी ही देती है। छः फरवरी को लोक सभा में डिफेंस मिनिस्टर ने तफसीली बयान देते हुए यह तो बता दिया कि एक साल में कितने पाकिस्तानी घुसपैठियों और दहशतगर्दों को मारा गया लेकिन यह नहीं बताया कि इस दौरान देश के कितने बहादुर फौजियों को अपनी शहादत देनी पड़ी। हकीकत यह है कि इस दौरान तकरीबन सौ फौजियों को शहादत देनी पड़ी है।

यह दावा कि हमने इतने पाकिस्तानियों को मारा उस वक्त बेमायनी (अर्थहीन) हो जाता है जब यह बात सामने आती है कि देश के कितने फौजी शहीद हुए। यह सिलसिला इसलिए चल रहा है कि मोदी हुकूमत पाकिस्तान को ठीक करने के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है और मौजूदा आर्मी चीफ सियासतदानों की तरह सिर्फ बयानबाजी करते रहते हैं। इतनी बड़ी तादाद में अपने फौजियों को शहीद कराकर अगर पाकिस्तान के सौ-डेढ सौ दहशतगर्दों को मार भी लिया गया तो उन्हें मारने का कोई फायदा नहीं है।

श्रीनगर के महाराजा हरि सिंह अस्पताल से छः फरवरी को लश्कर-ए-तैयबा के जो खतरनाक दहशतगर्द नवेद जट्ट उर्फ अबू हंजुल्लाह पुलिस की गिरफ्त से फरार हुआ है। वह बहुत ही खतरनाक किस्म का दहशतगर्द है जो 2012 से ही घुसपैठ करके कश्मीर आ गया था। अगले ही साल 2013 में उसने एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और सीआरपीएफ के एक जवान को कत्ल कर दिया था। हैदरपुरा इलाके में उसने फौजियों पर हमला किया था। सिल्वर स्टार होटल और नेशनल हाई वे पर फौज पर हुए हमलों में भी वह शामिल था। पुलिस से हथियार छीनने की भी कई वारदातें वह अंजाम दे चुका था। 26 अगस्त 2014 को जब उसे गिरफ्तार किया गया उस वक्त तक वह कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ कमाण्डर बन चुका था।

पुलिस कस्टडी से इस तरह उसका फरार होना पुलिस और सिक्योरिटी फोर्सेज के लिए एक इंतेहाई शर्मनाक वाक्या है। वह अस्पताल से भाग कर कहां गया कोई नहीं जानता, लेकिन अगर वह श्रीनगर में ही कहीं छुपा है तो किसी भी वक्त वह पुलिस, सिक्योरिटी फोर्सेज और आम लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। खबर यह भी है कि उसके साथी दहशतगर्दों ने पुलिस से छुडाकर उसे उसी दिन बार्डर पार कराकर पाकिस्तान भेज दिया। अगर ऐसा हुआ है तो यह भी सिक्योरिटी अमले के लिए शर्मनाक बात है कि वह श्रीनगर अस्पताल से भागते हुए सरहद पार कर जाए और रास्ते में उसे कोई रोक न सके।

इस मामले में सरकार की नाकामियों के पेशेनजर यकीनी तौर पर सरकार की तरफ से चंद दिनों के अंदर ही बस एक बयान आ जाएगा कि हमने पाकिस्तान में घुस कर उसकी फौजी चैकियों को तबाह कर दिया। खबर लिखे जाने तक नवेद जट्ट को भगाए जाने के मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने दावा किया है कि नवेद उर्फ अबू हजुंल्लाह को भगाए जाने में इस्तेमाल हुई  मोटरसाइकिल और गाडी को भी पकड़ा गया है। गिरफ्तार लोगों में जेल का सुप्रीटेडेट भी शामिल है।

इससे पहलेे चार फरवरी को जम्मू के राजौरी सेक्टर के तरकुंडी में  वाके (स्थित) हिन्दुस्तान की एक फौजी चैकी पर पाकिस्तानियों ने मिसाइल से हमला करके जैक्लाई यूनिट के एक कैप्टन कपिल कुडूं समेत चार फौजियों व आधा दर्जन से ज्यादा शहरियों को कत्ल कर दिया था। कपिल कुंडू हरियाणा में गुडगांव के करीब रसिंका गांव के रहने वाले थे। बाइस साल के कुंडू अपने वाल्दैन की इकलौती औलाद थे। उनकी वालिदा ने कहा कि अगर उनके एक और बेटा होता तो वह उसे भी फौज में भेज देती कैप्टन कुंडू के अलावा मारे गए 23 साल के रायफल मैन शुभम सिंह, कठुवा के रहने वाले थे। 27 साल के रायफल मैन राम अवतार मध्य प्रदेश में ग्वालियर के नजदीक बराका गांव के रहने वाले थे और 42 साल के हवलदार सांबा जिले के घगवाल के रहने वाले थे।

पाकिस्तान ने सरहद पर इस कदर सुंदरबनी से पुंछ तक इस कदर फायरिंग की कि 84 स्कूल बंद करने पडे कई हजार शहरियों को अपने घर छोड़कर महफूज जगहों पर भागना पड़ा। बडी तादाद में मवेशी गाय बैल भैंस व बकरियां वगैरह का भी नुक्सान हुआ लेकिन मोदी सरकार की जानिब से सिर्फ इतना कहकर जिम्मेदारी पूरी कर ली गई कि हम पाकिस्तान को सख्त जवाब देंगे।

(लेखक उर्दू के पत्रकार और साप्ताहिक उर्दू जदीद मरकज़ के संपादक हैं।)