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अलवर पुलिस ने चार्जशीट में पहलू खान समेत सभी पीड़ितों को बताया गो-तस्कर

राजस्थान के अलवर में पिछले साल अप्रैल में पीट-पीटकर मार दिए गए हरियाणा के डेरी किसान पहलू खान के साथियों पर पुलिस द्वारा दायर दूसरी चार्जशीट में गो-तस्करी का आरोप लगाया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार 24 जनवरी को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क अदालत में अलवर पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में चार लोगों को आरोपी बनाया गया है.

चार्जशीट के मुताबिक पहलू खान के तीन साथियों के पास ऐसा कोई दस्तावेज बरामद नहीं हुआ, जो साबित कर सके कि उन्होंने गाय खरीदने और ले जाने के लिए इजाजत ली थी. चौथे आरोपी जगदीश प्रसाद के नाम पर पिकअप ट्रक पंजीकृत था, इसलिए उन्हें आरोपी बनाया गया है.

बहरोड़ पुलिस स्टेशन के हेड कांस्टेबल हारून खान, जो इस मामले के जांच अधिकारी थे ने इस अखबार को बताया कि पुलिस को ऐसे कोई दस्तावेज नहीं मिले जिससे उनके पशु ले जाने की वजह पता चलती हो. इसलिए उन्हें गो तस्करी का दोषी माना गया है.

एक अप्रैल की घटना के बाद पुलिस ने दो मामले दर्ज किए थे. एक पहलू की हत्या के खिलाफ हमलावरों पर और दूसरा पहलू और उसके साथियों के खिलाफ गाय तस्करी में शामिल होने का.

पुलिस का कहना है कि आरोपी उचित दस्तावेजों के बिना ही गाय को राजस्थान से हरियाणा ले जा रहे थे, जो राज्य के कानून के अनुसार अपराध है.

ज्ञात हो कि अप्रैल महीने में नूह (हरियाणा) के रहने वाले 55 वर्षीय पहलू खान जयपुर से पशु खरीदकर ला रहे थे, जब बहरोड़ में कथित गोरक्षकों ने उन्हें  गो तस्करी के शक में बुरी तरह पीटा, जिसके दो दिन बाद अस्पताल में पहलू खान ने दम तोड़ दिया.

पुलिस ने वीडियो फुटेज से नौ लोगों को पहचानने के बाद खान की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. मौत से पहले पहलू खान ने अस्पताल में एक पुलिस अधिकारी के सामने अपना बयान दर्ज करवाया था, जिसमें 6 लोगों के नाम लिए थे.

पिछले साल सितंबर में आई एक पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक पहलू खान पर हमले के समय ये 6 लोग मौका-ए-वारदात पर मौजूद नहीं थे. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन का हवाला देते हुए इन छह लोगों को क्लीन चिट दी थी.

जनवरी 24 की चार्जशीट के अनुसार चार लोगों को आरोपी बनाया गया है. अज़मत और रफ़ीक पहलू के गांव जयसिंहपुर, हरियाणा के रहने वाले हैं. इसके अलावा पिक अप के ड्राइवर अर्जुन लाल यादव और उनके पिता जगदीश प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है.

अजमत और रफ़ीक दोनों उस हमले में घायल हुए थे. अर्जुन भागने में कामयाब रहा था. चार्जशीट के अनुसार जांच पूरी होने पर गवाहों के बयान और मिले सबूतों के अनुसार, इन तीनों को राजस्थान गोवंश पशु (अस्थायी प्रवासन या निर्यात का नियमन और वध का निषेध) अधिनियम, 1995 की धारा 5, 8, 9 के तहत आरोपी बनाया गया है और अर्जुन के पिता जगदीश प्रसाद को धारा 6 के तहत.

इस अधिनियम की धारा 5 के मुताबिक वध के उद्देश्य से गोवंशीय पशु निर्यात करना निषेध है.

पुलिस कि इस चार्जशीट पर अज़मत का कहना है, ‘क्या ये इंसाफ है? भीड़ ने हम पर हमला किया, पीटा और अब हमें ही आरोपी बना दिया गया. मेरे पास जयपुर महानगर पालिका की वैध रसीद है. खरीद करते समय हमें किसी ने नहीं बताया कि इसके अतिरिक्त भी कोई अनुमति लेनी है.’ हमले में अज़मत को गहरी चोटें आई थीं, जिसकी वजह से वे महीनों बिस्तर पर रहे.

उन्होंने आगे कहा, ‘पिटाई के चलते मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट आई है. एक लाख से ज्यादा पैसा इलाज में खर्च हो गया है और अब अदालत का खर्च हम सामान गिरवी रखकर उठा रहे हैं.’

अज़मत और रफ़ीक का कहना है कि उनके पास कोई काम नहीं है इसलिए उनके परिवारों के लिए पैसे कमाना और मुश्किल ही गया है. वहीं अर्जुन का कहना है कि उसे न केवल अस्पताल का खर्च उठाना पड़ा, बल्कि उसके ट्रक की मरम्मत में भी पैसे लगे.

अर्जुन ने बताया, ‘मुझे पता है कि यह मेरे लिए दूसरी जिंदगी है क्योंकि मैं (हमले के समय) भागने में कामयाब हो गया था. 1.5 लाख रुपये से ज्यादा सिर्फ ट्रक की मरम्मत में खर्च हो गया है और गाड़ी के कागज अब भी पुलिस के पास हैं. मुझे नहीं पता कि मुकदमे का खर्च कैसे उठाऊंगा.’

पुलिस की चार्जशीट में अर्जुन के पिता जगदीश को भी आरोपी बताया गया है क्योंकि ट्रक उसके नाम पर रजिस्टर था. हमले के समय जगदीश मौजूद नहीं थे.

कागज पूरे न होने के सवाल पर अजमत कहते हैं, ‘क्या जयपुर की मंडी में सरकार की ओर से लोग नहीं होने चाहिए जो जानवरों की खरीद से जुड़े कागजात के बारे में बताये? जिन लोगों ने हमें खरीद की रसीद दी, वे जानते थे कि हम हरियाणा से हैं और जानवर इस राज्य से बाहर लेकर जाएंगे. तब भी हमें किसी अतिरिक्त दस्तावेज के बारे में नहीं बताया गया.’