Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
हाशिया
हेल्थ

मध्य प्रदेश में हर रोज 92 बच्चों की मौत कुपोषण के चलते होती है: राज्य सरकार

कुपोषण के चलते अक्सर सुर्खियों में रहने वाले मध्य प्रदेश में हर रोज 92 बच्चों की मौत कुपोषण के चलते होती है. यह जानकारी मध्य प्रदेश विधानसभा में स्वयं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने दी है.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने स्वीकारा कि प्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है. 2016 में यह आंकड़ा 74 था.

ताजा आंकड़े जनवरी 2018 के हैं.

महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के आधार पर दैनिक भास्कर अख़बार ने लिखा है कि प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 तक करीब 57,000 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया.

इस बीच, 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के बीच  396 दिनों में 5 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 28,948 रही, जबकि 6 से 12 वर्ष के 462 बच्चों की मौत हुई. इस तरह इस अवधि में कुल 29,410 बच्चों की मौत हुई. इस तरह औसतन प्रतिदिन 74 बच्चों की मौत हुई.

तो वहीं, अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 के बीच के 183 दिनों में 1 वर्ष तक के 13,843 बच्चे कुपोषण के चलते काल के गाल में समा गए. 1 से 5 वर्ष के 3,055 बच्चों की मौत हुई. इस तरह कुल 16,898 बच्चों की मृत्यु हुई. 183 दिन में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई.

वहीं, ताजा आंकड़े अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच के 123 दिनों के हैं. इस अवधि में 0 से 1 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 9,124 थी. तो वहीं, 1 से 5 वर्ष की उम्र के बीच वाले 2,215 बच्चों की मौत हो गई. यानी कि कुल 11,339 बच्चों की मृत्यु हुई. जिसका प्रतिदिन औसत 92 निकलता है.

आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि कुपोषण से लड़ने के मध्य प्रदेश सरकार के दावे इस दौरान खोखले ही साबित हुए हैं. क्योंकि इस अवधि में प्रदेश में कुपोषण में वृद्धि दर्ज की गई है.

जहां, 1 जनवरी 2017 तक के आंकड़े बताते हैं कि उस समय तक 70,60,320 बच्चों का प्रदेश में वजन किया गया. जिनमें से 56,13,327 बच्चे सामान्य वजन के थे. 12 लाख 84 हजार 36 कम वजन के पाए गए और 1 लाख 62 हजार 957 बच्चे अतिकुपोषित मिले. कुल 14 लाख 46 हजार 993 बच्चे कुपोषित थे.

तो फरवरी 2017 में वजन किए गए 71,35,036 में से 14,17,800 बच्चे कुपोषित पाए गए. इस दौरान भले ही संख्या में कमी दर्ज की गई. लेकिन दिसंबर 2017 में तौले गए 69,84,872 बच्चों में भी 14 लाख के ऊपर कुपोषित बच्चे मिले. गौरतलब है कि इस दौरान 2 लाख कम बच्चों का वजन किया गया.

बहरहाल, यहां यह जिक्र करना जरूरी है कि जब सितंबर 2016 में प्रदेश के श्योपुर जिले जिसे ‘भारत का इथोपिया’ भी कहा जाता है, में कुपोषण के चलते  116 बच्चों की मौत हुई थी तो प्रदेश सरकार ने इस संबंध में श्वेत-पत्र लाने की घोषणआ की थी. लेकिन,प्रदेश प्रदेश की शिवराज सरकार कुपोषण को लेकर कितनी गंभीर है, यह इस बात से पता चलता है कि अब तक इस गंभीर मसले पर श्वेत-पत्र नहीं लाया जा सका है.

Democracia एक गैर-लाभकारी मीडिया संस्था हैं। जो पत्रकारिता को सरकार-कॉरपोरेट दबाव से आज़ाद रखने के लिए वचनबद्ध है। इसे जनमीडिया बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करें।