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उत्तर प्रदेश में ED की सात टीमें स्मारक घोटाले में कर रहीं छापेमारी

देश की राजनीति में चुनाव पूर्व छापों का दौर जारी है. नया छापा है स्मारक घोटाले में जो मायावती के सबसे करीबी माने जाने वाले नसीमद्दीन सिद्दीकी के खास सिपहसालार सीपी सिंह के 7 ठिकानों पर पड़ा है. जिस जांच में ये छापा पड़ा है वो मामला है 1 जनवरी 2014 यानि कार्रवाई में तेजी आई है.प्रवर्तन निदेशालय पांच साल बाद फ्रंटफुट पर है. दरअसल केन्द्रीय जांच ब्यूरो की चर्चा अक्टूबर से जितनी हुई उतनी शायद पहले कभी नहीं हुई हो.

पहले सीबीआई जहां अपने अंदरुनी विवाद को लेकर चर्चित रही. वहीं साल के पहले हफ्ते में छापों को लेकर रही. 2019 के पहले हफ्ते में ही आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला  के घर छापे के साथ सीबीआई एक बार फिर चर्चा में आ गई है.हमीरपुर खनन घोटाले को लेकर हुई इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का नाम भी आया.

ऐसे में आरोप लगना तो लाजमी था और हुआ भी ऐसे जैसे ही इस छापे के बाद खनन घोटाले में अखिलेश का नाम उछला माया और अखिलेश दोनों ने सीबीआई के बहाने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया. मामला अभी शांत ही नहीं हुआ था कि परवर्तन निदेशालय ने इसी मामले में बी चंद्रकला समेत कईयों को नोटिस जारी कर दिया.

फिर बात आई लखनऊ के गोमती नदी पर बने रिवर फ्रंट घोटाले की. इस मामले में ईडी ने लंबी चौड़ी छापेमारी की. ठेकेदार, इंजीनियर समेत कंपनियों के कई दफ्तरों में सीबीआई के छापे पड़े. लेकिन इस छापे को भी चुनावी बताया गया और आखिर बताया भी क्यों न जाय क्योंकि लोकसभा चुनाव जो करीब हैं. ईडी और सीबीआई की कार्रवाई सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं हुई.

भुनेश्वर में भी सीबीआई ने रोजवैली घोटाले में ममता के करीबी समझे जाने वाले फिल्म निर्माता वेंकटेश को गिरफ्तार कर लिया. जनवरी का अंतिम हफ्ता आते-आते सीबीआई का मामला उत्तर प्रदेश से निकल कर उड़ीसा होते हुए हरियाणा पहुंच गया.जमीन घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा समेत कईयों के ठिकानों पर छापे पड़े.

राजनीतिक हल्के में ये चर्चा जोरों पर है कि छापा भले ही हुड्डा पर पड़ा हो, लेकिन निशाना रॉबर्ट वाड्रा पर है. वैसे तो 31 जनवरी तक सीबीआई नें कुल 56 एफआईआर दर्ज किए हैं. लेकिन चर्चा सिर्फ 2-3 की ही है. क्योंकि छापे और बड़ी कार्रवाई आईसीआईसीआई बैंक को छोड़ दें तो इन 2-3 मामलों में ही हुई.

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