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7 नवंबर 1917. सोवियत क्रांति का दिन!

समर अनार्या

वो जिसने सदियों की तानाशाही को उखाड़ फेंका।वो जिसने पहली बार मजलूमों को, कुचलों को, किसानों को, मज़दूरों को आज़ादी का, हक़दारी का सपना दिया।

बेशक उसके बाद बहुत कुछ सही हुआ तो बहुत कुछ गड़बड़ भी। बेशक उसके बाद भुखमरी ख़त्म कर देने की, औरतों की बराबरी की, सबको पढ़ाई की, चिकित्सा की, बराबरी की जीतें भी हैं तो गुलाग भी, मॉस्को ट्रायल से लेकर बरास्ते माओ की सांस्कृतिक क्रांति पोल पोट के पर्ज भी- पर फिर उम्मीद कोई है तो वहीं है- फिर उम्मीद चाहे नेपाल के रोल्पा के पहाड़ों पर किसी अनपढ़ किसान की हो या फिर कराकास में प्रति क्रांतिकारियों के तख़्ता पलट की कोशिशों में घेर लिये गये प्रेसीडेंट कामरेड ह्यूगो शावेज़ के समर्थन में लाल झंडा लिये सड़कों पर कूद पड़ी वो अनाम दोस्त हो!

बेशक आज पीछे हट के खड़े होने का वक़्त है- पर फिर उम्मीद का रंग हमेशा लाल होता है और क्रांतियाँ कभी नहीं रुकतीं। शावेज़ की पहली असफल क्रांति से शुरु कर जीत तक पहुँचती ही हैं!

4 फरवरी 1993 की वह उदास सुबह हारे हुए चावेज़ की सुबह थी, वेनेजुएला के आसमानों में बहुत उदास सूरज के चढ़ने की सुबह थी. वह ऐसी सुबह थी जो हारी हुई क्रांतियों को तख्तापलट और पराजित क्रांतिकारियों के युद्धबंदी बन गद्दार कहलाये जाने की शामों सी चढ़ती है….
यूं तो हार तब तक मुकम्मल नहीं थी पर कामरेड चावेज़ की उस लड़ाई के नतीजे बहुत साफ़ हो चुके थे… क्रान्ति की शुरुआत होते ही अपना महल छोड़ भाग गए राष्ट्रपति कार्लोस अन्द्रेज़ पेरेज़ ने सुबह ही टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम सन्देश में ‘तख्तापलट’ की असफल कोशिश के कुचल दिए जाने की ख़बर देते हुए क्रांतिकारियों के कब्जे वाले मोर्चों पर हवाई हमले कर उनके साथ साथ हजारों आम नागरिकों की जान ले लेने के अपने इरादे साफ़ कर दिए थ….

कामरेड चावेज़ को एक फैसला लेना था और वह उन्होंने लिया भी. सुबह 10 बजे के पहले ही ‘षड्यंत्रकारी’ चावेज़ रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पर लाये गए थे और उनके सामने सवाल था कि सारे संवाद टूट जाने की स्थिति में अब भी लड़ रहे अपने साथियों को कैसे रोका जाय. ठीक उसी वक़्त किसी बेवकूफ सैन्य अधिकारी को चावेज़ को राष्ट्रीय टेलीविजन पर यह सन्देश देने को कहने का ख्याल आया था. प्रस्ताव स्वीकारते हुए चावेज़ ने साफ़ कर दिया था कि वह न तो हथकड़ी पहनेंगे, न वर्दी उतारेंगे और वह अपना सन्देश पहले लिख कर नहीं देंगे. और फिर उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है.

वेनेजुएला की जनता ने शायद पहली बार एक नेता को अपनी हार को स्वीकारने और कराकास पर कब्ज़ा न कर पाने की विफलता को देखते हुए इस हार की पूरी जिम्मेदारी लेने का नैतिक साहस दिखाते हुए देखा था. उन्होंने पहली बार एक ऐसे सैनिक को देखा था जिसने अपने साथियों की जान बचने के लिए उन्हें रुकने का सन्देश देने के पहले न केवल अपनी अपनी वर्दी ठीक की थी और बेरेट पहनी थी बल्कि वेनेजुएला के लोगों को सुप्रभात भी कहा था.

“यह बोलिवारियन सन्देश उन सभी बहादुर सैनिकों के लिए हैं जो अरागुआ में पैराट्रूपर और वैलेंसिया में टैंक रेजिमेंट में हैं. कामरेड्स: दुर्भाग्य से हम, अभी के लिए, अपने उद्धेश्यों को पूरा कर पाने में असफल रहे हैं. .. पर यकीन रखें कि फिर नए अवसर आयेंगे और राष्ट्र को एक बेहतर भविष्य के रास्ते पर बढ़ना ही होगा….कामरेड्स, साझीदारी के इस सन्देश को सुनिए. मैं आपकी वफादारी, साहस और निस्वार्थ लड़ाई के लिए कृतज्ञ हूँ. देश और आप सब के सामने मैं इस बोलिवारियन सैन्य आन्दोलन की जिम्मेदारी लेता हूँ. “अपने उद्देश्यों को पूरा कर पाने में अभी के लिए असफल रह गए हम लोग क्रान्ति को स्थगित कर रहे हैं कामरेड्स. बस अभी के लिए.” धन्यवाद.”

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