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साल 2018 में 1.10 करोड़ लोगों ने गंवाई नौकरी

नई दिल्ली. बेरोजगारी के मुद्दे पर बडे़-बड़े दावें करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार की कलई खुल गई है. भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली ख्यातिप्राप्त संस्था सेंटर फॉर मोनेटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने अपने रिपोर्ट में खुलासा किया है कि भारत ने साल 2018 में 11 मिलियन (1.10 करोड़) नौकरियां गंवाई. सीएमआईई की हालिया जारी रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि बीते वर्ष ज्यादातर नौकरियां संगठित क्षेत्र की बजाए असंगठित क्षेत्र में गई. रिपोर्ट की माने तो नौकरियां गंवाने वाले लोगों में अधिकांश महिलाएं, दिहाड़ी मजदूर और छोट व्यापारी शामिल है.

सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 के दिसंबर तक मिलने वाले कुल रोजगारों की संख्या 397 मिलियन रही. जो पिछले साल 2017 के मुकाबले 10.9 मिलियन कम है. रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2017 में 407.9 मिलियन लोगों को रोजगार मिला था. अर्थव्यवस्था पर बारीक नजर रखने वाले लोगों के द्वारा तैयार किए गए इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है. इसमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के कामगार प्रभावित हुए है.

नौकरियां गंवाने वाले में ज्यादातर लोग कृषि पर आधारित हैं. रिपोर्ट का कहना है कि साल 2018 में करीब 90.10 लाख नौकरियां ग्रामीण इलाके में गई. ग्रामीण इलाके में ज्यादातर लोग कृषि और असंगठित क्षेत्र से जुड़े होते है. लिहाजा इसका प्रत्यक्ष आंकलन लगा पाना काफी मुश्किल है. वहीं रिपोर्ट कहती है कि बीते वर्ष शहरी क्षेत्र में करीब 10.80 लाख लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा.

बता दें कि देश आम चुनाव के दहलीज पर है. कुछ ही महीनों के बाद देश में एक नई सरकार चुनी जानी है. इससे पहले 2014 आम चुनाव के दौरान भी बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा था. संभावना है कि लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी बेरोजगारी का मुद्दा गरम रहेगा. विपक्षी दलें इस मुद्दे पर पहले से ही नरेंद्र मोदी सरकार को घेरती रही है.

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