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जानिए कौन है योगी आदित्यनाथ

आदित्यनाथ और उनके संगठन की सांप्रदायिक गतिविधियों की वजह से गोरखपुर और उसके आसपास के इलाकों में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। दरअसल यह 2007 में योगी आदित्यनाथ और उनके संगठन की विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी थी।

10 फरवरी,1999 का दिन था। योगी आदित्यनाथ और और उनके हथियारबंद समर्थकों ने यूपी में महाराजगंज जिले के मुस्लिम बहुल पंचरुखिया गांव के कब्रिस्तान में तोड़फोड़ शुरू कर दी। वारदात की खबर मिलते ही जैसे ही पुलिस ने कार्रवाई की वे भाग लिए। रास्ते में उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक दल पर फायरिंग की, जो उस समय में सत्ता में बैठी भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था।  योगी और उनके समर्थकों की इस फायरिंग में कम से कम चार लोग घायल हो गए थे। घायलों में एक थे हेड कांस्टेबल सत्यप्रकाश यादव। वह प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समाजवादी नेता तलत अजीज पर्सनल सिक्यूरिटी गार्ड थे। सत्यप्रकाश यादव की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। इस मामले में महाराजगंज के कोतवाली थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। इस तरह यह आदित्यनाथ और उनके समर्थकों की ओर से की जाने वाली हिंसा की पहली घटना थी, जिसमें एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

पंचरुखिया मामले में दर्ज एफआईआर में योगी और अन्य 24 लोगों के नाम थे, जो बाद में पहचान लिये गए थे। उन पर हत्या की कोशिश, दंगा करने, खतरनाक हथियार रखने, पूजा स्थल को अपवित्र करने और मुस्लिम कब्रिस्तान में अनधिकृत प्रवेश और दो धार्मिक समुदायों बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के मामले दर्ज किए गए थे। यह पहला स्पष्ट मामला था, जिसमें आदित्यनाथ दंगा करवाने की तैयारी में थे। इस मामले के एक साल पहले ही आदित्यनाथ सक्रिय राजनीति में आ गए और पहली बार 1998 में गोरखपुर सीट से जीत कर पार्लियामेंट पहुंच गए थे।

आदित्यनाथ ने 2002 में मुस्लिम विरोधी संगठन हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया। इसके बाद गोरखपुर और आसपास के इलाकों में जब-तब सांप्रदायिक दंगे होने लगे। इस संगठन के बनने के पहले ही साल इस इलाके में छह बड़े हिदू-मुस्लिम दंगे हुए। ये थे-कुशीनगर जिले के मोहन मुंडेरा गांव , गोरखपुर जिले के नथुआ गांव और गोरखपुर सिटी के तुर्कमानपुर इलाके के दंगे। इसके अलावा उसी साल अगस्त में महाराजगंज के नरकठा गांव में दंगे हुए। फिर महाराजगंज के भेदाही गांव में दंगे हुए। सितंबर में संत कबीरनगर के धानघाटा गांव में दंगे हुए। ज्यादातर मामले आपराधिक घटना के तौर पर शुरू हुए थे लेकिन आदित्यनाथ या हिंदू युवा वाहिनी के दूसरे नेताओं के कूद पड़ने से ये सांप्रदायिक दंगे में तब्दील हो गए थे।

मसलन, 2002 में गोरखपुर के तुर्कमानपुर इलाके में आदित्यनाथ और उनके चेलों ने एक छोटे से झगड़े के बाद हिंदू और मुस्लिमों के बीच तनाव को बिल्कुल भड़का दिया। दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई और गलियों के टकराव पूरी तरह सांप्रदायिक दंगे में तब्दील हो गए। वर्ष 2002 से 2007 के बीच गोरखपुर और आसपास के जिलों में 22 ऐसे दंगे हुए, जिनमें आदित्यनाथ और उनके गुर्गे शामिल थे।

गोरखपुर और आसपास के इलाकों में दंगे आदित्यनाथ और उनके संगठन हिंदू युवा वाहिनी की सांप्रदायिक गतिविधियों की वजह से भड़के थे। दरअसल यह आदित्यनाथ और उनके संगठन की 2007 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी थी। इन दंगों में दो लोगों की मौत हो गई थी और करोड़ों की संपत्ति जला दी गई थी। जनवरी-फरवरी के दौरान यह पूरा इलाका कई दिनों तक कर्फ्यू के साये में था। 28 जनवरी, 2007 को आदित्यनाथ और दर्जन भर हिंदू वाहिनी के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उस दौरान ये लोग गोरखपुर के तनावग्रस्त इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे थे। इसके एक दिन पहले ही ये लोग एक छोटी आपराधिक घटना को सांप्रदायिक दंगे के तौर पर भड़काने की कोशिश कर चुके थे। इस दौरान योगी ने खूब भड़काऊ भाषण दिए थे। योगी और उनके लोगों ने 29 तारीख को मुहर्रम के दौरान निकाले जाने वाले ताजिया को जला डालने की धमकी थी। यही वजह है कि प्रशासन को 28 तारीख को योगी और उनके साथियों को गिरफ्तार करना पड़ा था। आदित्यनाथ 7 फरवरी तक जेल में रहे। इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई।

उस दौरान योगी के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर अभी भी क्राइम ब्रांच की तफ्तीश जारी है। राज्य पुलिस की जांच और खुफिया विभाग की जांच अधूरी है। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले अभी बंद नहीं हुए हैं।

(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के हैं। सबरंगइंडिया के शुक्रिया के साथ)